चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर CBI का बड़ा ऑपरेशन, 5 हजार अपराधी और लाखों के लेनदेन का खुलासा

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बाल यौन शोषण केस में सीबीआई का बहुत बड़ा ऑपरेशन हुआ है। सीबीआई ने 14 राज्यों के करीब 77 शहरों में छापे मारे हैं। अलग-अलग शहरों से सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई की तरफ से 25 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। जबकि 50 से ज्यादा व्हाट्सएप ग्रुप सीबीआई की रडार पर हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का कहना है कि उसने कथित ऑनलाइन से संबंधित एक मामले की चल रही जांच में दिल्ली, ढेंकनाल (ओडिशा), नोएडा (यूपी), झांसी (यूपी), तिरुपति (आंध्र प्रदेश) सहित विभिन्न स्थानों से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

इस मामले में सीबीआई काफी लंबे वक्त से तफ्तीश कर रही थी। तकरीबन 23 एफआईआर अलग-अलग शहरों में दर्ज की गई थी। जिसके बाद एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। सीबीआई के पास करीब 83 लोगों के बारे में जानकारी थी। 23 एफआईआर के अंदर इन्हीं लोगों को आरोपी बनाया गया। जिसके बाद 14 शहरों के 77 ठिकानों पर एक साथ रेड की गई। सात लोगों में से 3 दिल्ली समेत अन्य चार शहरों से गिरफ्तारी हुई है। दिल्ली में गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे सीबीआई के रिमांड पर भेज दिया गया है।

50 ग्रुप में 5 हजार से ज्यादा अपराधी शामिल

सीबीआई के सूत्रों ने  बताया कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित कंटेट सोशल मीडिया पर शेयर करने वाले 50 ग्रुप में 5 हजार से ज्यादा अपराधी शामिल हैं. इनमें पाकिस्तान (36), कनाडा (35), अमेरिका (35), बांग्लादेश (31), श्रीलंका (30), नाइजीरिया (28), अजेरबैजान (27), यमन (24) और मलेशिया (22) के लोग शामिल हैं.

सूत्रों का कहना है कि सीबीआई विभिन्न विदेशी जांच एजेंसियों के साथ कोर्डिनेट करके इस मामले में शामिल विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बना रही है और CSEM (Child sexual exploitation material) कहां से आ रहा है इसके बारे में पता लगाना चाहती है. इसके अलावा सीबीआई अपनी सहयोगी जांच एजेंसियों से भी इस मामले में मदद ले रही है.

पैसों के लेनदेन की जांच भी जारी

शुरुआती जांच में यह पाया गया कि, कुछ लोग पैसों के लिए चाइल्ड पोर्नोग्राफी के व्यापार में शामिल हैं. सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि सर्चिंग के दौरान विभिन्न लोकेशन से मोबाइल, लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं. सूत्रों ने बताया कि, इस बात का खुलासा हुआ है कि ये लोग सोशल मीडिया ग्रुप, साइट्स और प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो, पिक्चर, पोस्ट व लिंक शेयर करते थे. इसके जरिए आरोपी नियमित रूप से पैसा कमाते थे, जो कि उनके द्वारा लिंक अकाउंट में आता था. सूत्रों ने कहा कि इन अपराधियों के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक का पता लगाने के लिए पैसों से जुड़े लेन-देन की जांच की जा रही है.

 

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