सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में प्रोमोशन घोटाला

सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में हुए प्रमोशन घोटाले के संबंध में बैंक के कर्मचारी नेता मुकेश जोशी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर घोटाले का खुलासा किया है। श्री जोशी ने आरटीआई से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए कहा है कि बैंक में चेयरमैन नंदा और उनकी टीम द्वारा की गई पदोन्नितियां अवैध हैं। इसके लिए दोषी पाए जाने पर श्री नंदा को आईपीसी की धारा 166 के तहत एक साल तक की कैद हो सकती है।

 

 

 

तिथी : 15.03.2020
नरेन्द्र दामोदरदास मोदी
माननीय प्रधानमंत्री
भारत सरकार
विषय : सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के चेयरमैन ए.के.नंदा ने वर्ष 2019-20 के प्रोमोशन में किया बड़ा घोटाला.
मान्यवर,
किसी भी बैंक में प्रोमोशन तय नियमों के अनुसार किये जाते हैं और इन नियमों में बदलाव करने के लिए भी ऑथरिटी तय होती है. ग्रामीण बैंकों के केस में रिक्रूटमेंट एवं प्रोमोशन पॉलिसी में बदलाव करने के लिए अधिकृत ऑथरिटी “भारत सरकार” है. परन्तु सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक नंदा एंड कंपनी ने बोर्ड को अंधेरे में रखकर इन नियमों में बदलाव करवाएं एवं वर्ष 2019-20 के प्रोमोशन किये जो असवैंधानिक एवं गैरकानूनी हैं.

ग्रामीण बैंकों में अगले वर्ष रिटायर होने वाले कर्मचारियों के अगेंस्ट वेकेंसी क्रियेट करने का नियम नहीं है. फिर ऐसा क्यों किया गया, इसका अंदाजा लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है. यहां यह भी ध्यान देने योग्य है कि ये नियम सिर्फ स्केल 4 की वेकेंसी सृजन करने के लिए बदले गए क्योंकि नियमानुसार स्केल 4 की वेकेंसी ना के बराबर (शायद 1 ही बनती थी) बन रही थी. अपने अधिकार क्षेत्र का उलंघन अपराधिक षडयंत्र की श्रेणी में आता है. अतः नंदा जी के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए.

नियम :

ग्रामीण बैंकों में वेकेंसी गत 31 मार्च के आंकडों पर बनती हैं. ग्रामीण बैंकों के सर्विस रूल्स में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि अगले वर्ष में होने रिटायरमेंट होने वाले कर्मचारियों की जगह वेकेंसी क्रियेट की जाएं. राष्ट्रीयकृत बैंकों में ऐसा होता है लेकिन वहां ऐसी वेकेंसी नार्मल तरीके से बन रही वेकेंसियों का 25% ही हो सकती हैं (ऐसा नियम है).

इस बार की प्रोमोशन के लिए उसी तर्ज पर यहां नियमों में बदलाव करवाया गया परन्तु यहां तीन बातें हैं जिन पर इंवेस्टिगेशन की जानी चाहिए. पहली कि इन नियमों में बदलाव करने के लिए अधिकृत क्या नंदा जी थे ? दूसरा राष्ट्रीयकृत बैंकों की तरह 25% की कंडीशन यहां क्यों नहीं लगाई गई ? और ये तीसरा यह रुल सिर्फ स्केल 4 की वेकेंसी क्रियेट करने के लिए बनाया गया, ऐसा क्यों ?

पहले भी हुए थे बदलाव : प्रोमोशन के लिए तय नियमों में पहले भी बदलाव तत्कालीन चेयरमैन प्रवीन जैन ने किये थे जिनके तहत प्रोमोशन में इंटरव्यू व CR में मिलाकर 60% अंक लेना अनिवार्य किया गया था. जिसे कुछ अधिकारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी व हाईकोर्ट ने ऐसे नियमों को निरस्त कर दो अधिकारियों महेश कुकरेजा व जी.सी.चांदना को बैकडेट से प्रोमोट करवाया.

इन दो अधिकारियों के प्रोमोट होने पर दो अधिकारी रतन सिंह व प्रीत सिंह का प्रोमोशन कैंसल किया जाना था. श्री रतन सिंह तो रिटायर हो गए थे इसलिए उनको तो कर नहीं सकते थे. और प्रीत सिंह को स्केल 3 बनाने का आफिस नोट तैयार हो गया था परन्तु फिर राजेश गोयल को चढावा चढाया गया और मामला सैटल. ये है इस बैंक की कार्यप्रणाली.

जब हाईकोर्ट ने निर्देश दे दिए थे कि ऐसे आर्बिट्रेरी बदलाव अवैध हैं तो नंदा जी ने ऐसा क्यों किया ?
घोटाले की बू :

इस वर्ष स्केल 4 प्रोमोशन का रिजल्ट 14 जून 2019 को जारी किया गया था जिसमें प्रोमोट हुए 6 अधिकारियों के सीनियरिटी नं हैं – 8, 29, 48, 65, 76 व 94. (एक को तुरन्त प्रभाव से व 5 को वेटिंग लिस्ट में रखा गया). सीनियरटी नं से ही यह अनुमान लगाना आसान है कि इन प्रोमोशन में बंदरबांट की गई है. गहनता से जांच की जाए तो पता चलेगा कि कैसे सीनियरटी नं 94 तक के अधिकारियों को प्रोमोट कर दिया गया क्योंकि इनसे काबिल बहुत अधिकारी थे जिनकी अच्छी परफॉर्मेंस होने के बावजूद पहले तो CR में कम नंबर दिये व फिर इंटरव्यू में.

इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि कुछ अधिकारियों के आर.एम से अच्छी रेटिंग पाने के बाद जी.एम लेवल पर CR के मार्क्स घटाये गए ताकि उनको हर लेवल पर काटा जा सके. इसलिए मान्यवर एक वैज्ञानिक इंक्वायरी की जरुरत है जो इस तरह की हरकत को बैंक के HRMS में अंदर तक घुसकर पकड़ सके. इसके बावजूद एक जन (सातवां) को दिसंबर में प्रोमोट कर दिया गया. जबकि उसके बाद न तो वेकेंसी निकली एवं न ही कोई इंटरव्यू हुए.

यहां ध्यान देने योग्य है कि जब जी.एम राजेश गोयल की ट्रांस्फर हो गई थी तो भी उन्हें रिलीव नहीं किया गया था कयोंकि एक बोर्ड की मीटिंग बुलाई गई थी जिसमें एक जन को प्रोमोट करने के षड्यंत्र को अमलीजामा पहनाया जाना बाकी था. और ऐसा नंदा जी सभी गोरखधंधों में अपने साथी राजेश गोयल के होते ही कर सकते थे. बिना कंसीडरेशन का तो ऐसा हो नहीं सकता. बैंक में चर्चा है कि इस साल हुई प्रोमोशन प्रोसेस में मोटे पैसों का लेन-देन हुआ है. बाद में प्रोमोट हुए अधिकारी की सूचना तो आज तक बैंक ने सर्कुलर जारी कर नहीं बताई है.

एक बात और :

यह भी पहले से तय होता है कि किन किन प्रोमोट करना है किनको नहीं. जिन अधिकारियों को प्रोमोट नहीं करना है उनको बिना किसी कारण चार्जशीट कर दिया जाता है और जिनको प्रोमोट करना होता है उनके चार्जशीट से संबंधित मामलों को भी इंटरव्यू से कुछ पहले ही निपटा दिया जाता है.
मेरी आपसे प्रार्थना है कि इस वर्ष हुए स्केल 4 के इंटरव्यू की डीपली जांच करवाई जाए, गलत नियमों के आधार पर हुए प्रोमोशन को रद्द किया जाए एवं दोषी अधिकारियों नंदा व राजेश गोयल के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज करवा कर जेल भेजा जाए.

मुकेश जोशी
चीफ कॉर्डिनेटर
सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स ऑर्गेनाइजेशन एवं गुड़गांव ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन

कॉपी :

सेक्रेटरी, वित्त सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय
चेयरमैन, पंजाब नेशनल बैंक
कमीशनर, मुख्य सतर्कता आयोग, दिल्ली
मुख्य सतर्कता अधिकारी, पी.एन.बी
आई.जी, पुलिस, रोहतक
पुलिस आयुक्त, रोहतक
कमीश्नर ऑफ पुलिस, फरीदाबाद

One thought on “सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में प्रोमोशन घोटाला”

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