चौबीस गांवों को निगम सीमा में शामिल करने को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार को दिया नोटिस

जिले के 24 गांवों को नगर निगम में शामिल करने के सरकार के फैसले के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। अब केस की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी। हाईकोर्ट में याचिका चंदावली गांव निवासी जसवंत पंवार ने डाली है। उनका आरोप है कि सरकार ने बगैर गांव वालों की शिकायत सुने मनमाने तरीके से उनके विकसित गांवों को जबरन नगर निगम सीमा में शामिल कर दिया।

सरकार इस बहाने गांवों के करोड़ों रुपए नगर निगम को देना चाहती है। सरकार 29 दिसंबर को नोटिफिकेशन जारी कर गांव मलेरना, रिवाजपुर, साहूपुरा, टिकावली, सोतई, तिलपत, चंदावली, भूपानी, मच्छगर, फिरोजपुर माजरा, मुजेड़ी, बारोली, नाचौली, प्रह्लादपुर माजरा, बादसाहपुर, भतौला, पलवली, फरीदपुर, नवादा तिगांव, खेड़ीखुर्द, नीमका, खेड़कलां, मिर्जापुर और बिंदापुर को नगर निगम सीमा में शामिल कर चुकी है।

करोड़ों रुपए हड़पना चाहती है सरकार: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले चंदावली गांव निवासी जसवंत पंवार का कहना है कि सरकार गांवों को जबरन निगम में शामिल कर पंचायतों की करोड़ों रुपए हड़पना चाहती है। उनका तर्क है कि जिन 24 गांवों को शामिल किया गया है वहां सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं हैं।

यहां के गांव नगर निगम के सेक्टरों और कॉलोनियों से बेहतर हैं। उनका यह भी कहना है कि पंचायतों की जिन करोड़ों रुपए पर सरकार की नजर है वह पैसा किसानों का है। किसानों की जमीन से ही सड़कें व गलियां निकाली गई हैं। ऐसे में हम अपना पैसा नगर निगम को क्यों दें।

अब इस केस की सुनवाई 28 अप्रैल को होगी। उधर नगर निगम के सीटीपी धर्मपाल का कहना है कि हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर सरकार से पक्ष जानना चाहा है। जवाब तैयार कराया जा रहा है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है।

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