नोएडा में नहीं हो रही फ्लैटों की रजिस्ट्री, प्राधिकरण अफसर दस्तखत करने को तैयार नहीं

गौतमबुद्ध नगर में फ्लैटों की रजिस्ट्री को लेकर पिछले 2 सप्ताह से ऊहापोह की हालत बनी हुई है। अब जानकारी मिल रही है कि नोएडा विकास प्राधिकरण के अफसर फ्लैटों की रजिस्ट्री के लिए लीज डीड पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। यह स्थिति गौतमबुद्ध नगर के जिला प्रशासन की ओर से जारी एक सलाह की वजह से बनी है। दरअसल, पिछले दिनों एक पत्र जिले के तीनों विकास प्राधिकरण और सब रजिस्ट्रार कार्यालयों को भेजा गया था। जिसमें कहा गया कि बिल्डर गलत सूचनाएं देकर और खरीदारों से ज्यादा पैसे लेकर रजिस्ट्री करवा रहे हैं। ऐसे में विकास प्राधिकरण की जवाबदेही भी बनती है।

फ्लैट खरीददार लगातार जिलाधिकारी और दूसरे अफसरों से मिलकर शिकायत कर रहे थे। उनका कहना है कि बिल्डर गलत वायदे करके फ्लैट बेचते हैं। रजिस्ट्री के वक्त तय सुविधाएं और संपत्ति उन्हें नहीं देते हैं। ऊपर से भारी भरकम स्टांप शुल्क उन्हें चुकाना पड़ता है। बड़ी संख्या में फ्लैट खरीदारों ने फ्लैट की रजिस्ट्री सुपर एरिया की बजाय कारपेट एरिया पर करने की मांग की थी। इन सारे मुद्दों को लेकर अपर जिलाधिकारी ने पत्र लिखा था। तब से नोएडा ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में फ्लैटों की रजिस्ट्री थमी हुई हैं। फ्लैट की रजिस्ट्री कराने वाले बायर्स को इन दिनों समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नोएडा प्राधिकरण ने नई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के फ्लैट की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस कारण प्राधिकरण के अधिकारी फ्लैट की रजिस्ट्री से संबंधित लीज डीड पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। जिसके चलते बायर्स की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।

प्राधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार एडीएम ने प्राधिकरण को एक पत्र जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि फ्लैट के दस्तावेजों पर बिल्डर के साथ-साथ प्राधिकरण के अधिकारी भी हस्ताक्षर करते हैं। इस स्थिति में यदी बिल्डर फॉल्ट स्टेटमेंट डॉक्यूमेंट दिए जाते हैं तो इसके लिए प्राधिकरण का अधिकारी भी जिम्मेदार होता है।जिसके चलते विभाग का कोई भी अधिकारी लीज पर साइन नहीं कर रहा। वहीं, इस कारण लोगों के खासी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर कोई भी अफसर बात करने या जबाव देने को तैयार नहीं है।

आपको बता दें कि फ्लैट की रजिस्ट्री शहर में एक ट्राई पार्टी एग्रीमेंट के रूप में होती है। लीज डीड पर बिल्डर के अलावा नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी और खरीदार हस्ताक्षर करते हैं। इसके साथ ही निबंधन विभाग में जब रजिस्ट्री होती है तो उस समय फ्लैट बायर के अलावा बिल्डर और प्राधिकरण के प्रतिनिधि की मौजूदगी जरूरी है। रजिस्ट्री में दोनों के हस्ताक्षर भी कराए जाते हैं। आपको यह भी बता दें कि शहर में बड़ी संख्या में बिल्डरों पर नोएडा प्राधिकरण के हजारों करोड़ रुपये बकाया हैं। जिसके चलते प्राधिकरण ने करीब 100 प्रोजेक्टों के फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्राधिकरण का बकाया नहीं देने पर 100 बिल्डर प्रोजेक्टों को फिलहाल डिफॉल्टर लिस्ट में डाला हुआ है। जिसके चलते इन बिल्डरों को विकास प्राधिकरण ने कंपलीशन सर्टिफिकेट और ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट नहीं दिए हैं। सीसी और ओसी के बिना प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं की जा सकती है।

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