कृषि कानूनों को वापस लेने वाला बिल पास,12 सांसद निलंबित

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संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री ने मीडियाकर्मियों को संबोधित किया। जिसमें उन्होंने कहा कि संसद में सवाल भी हों और शांति भी हो। वहीं दूसरी तरफ संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ और विवादित कृषि कानूनों को वापसी लेने वाला विधेयक दोनों सदनों में पेश किया गया।

शीतकालीन सत्र के पहले दिन विपक्ष के शोरगुल के बीच तीनों कृषि कानूनों को खत्म करने संबंधी एक विधेयक पेश किया गया जो बिना चर्चा के पारित हो गया। पहले इसे लोकसभा की मंजूरी मिल गई फिर इस विधेयक को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में पेश किया। इसी दौरान विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार बहुत विचार-विमर्श के बाद किसानों के कल्याण के लिए इन कानूनों को लेकर आई थी। लेकिन दुख की बात है कि कई बार प्रयत्न करने के बावजूद वह किसानों को समझा नहीं सकी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल ने अपने घोषणापत्र में कृषि सुधारों का वादा किया था।

वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पूरे सदन के सारे सदस्य कृषि कानून निरसन विधेयक का स्वागत करते हैं और कोई भी इसके विरोध में नहीं हैं क्योंकि यह किसानों का मुद्दा है। इस बिल के पास हो जाने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी सामने आए और उन्होंने सरकार की आलोचना की।

12 सांसदों को किया गया निलंबित

शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना समेत विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को पिछले मानसून सत्र के दौरान अशोभनीय आचरण के चलते राज्यसभा के मौजूदा सत्र से निलंबित कर दिया गया। उपसभापति हरिवंश की अनुमति से संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस सिलसिले में एक प्रस्ताव रखा जिसे विपक्षी दलों के हंगामे के बीच सदन ने मंजूरी दे दी। जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनमें कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी शामिल हैं।

सभी 12 सदस्यों पर आरोप है कि मानसून सत्र में राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान इन्होंने अमर्यादित आचरण एवं मार्शलों के साथ धक्का-मुक्की की थी। इस मामले को लेकर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने कार्यालय में मंगलवार सुबह राज्यसभा के विपक्षी सांसदों की बैठक बुलाई है। इस मामले में विपक्षी दलों का संयुक्त बयान भी सामने आया है। जिसमें 12 सांसदों के निलंबन को अलोकतांत्रिक करार दिया गया है।

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