पराली न जलाने वाले किसानों को सरकार की और से मिलेगा ये तोहफा

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पंजाब सरकार की ओर से धान की पराली न जलाने वाले किसानों को ढाई हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। इस साल पंजाब में 29 पॉइंट 3 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जा रही है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राज्य सरकारों और केंद्र दोनों द्वारा संयुक्त रूप से किसानों को मुआवजा देने की घोषणा की है। जिसमें मुआवजे का भुगतान पंजाब और दिल्ली सरकार 500 रुपए प्रति एकड़ के बराबर भागों में किया जाएगा। जबकि केंद्र द्वारा डेढ़ हजार रुपए प्रति एकड़ का भुगतान किया जाएगा। सीएम केजरीवाल ने कहा कि इस संबंध में वायु गुणवत्ता आयोग को एक प्रस्ताव भेजा है।

किसानों को दिए जाने वाली यह प्रोत्साहन राशि धान की पराली के इन सीटू प्रबंधन को बढ़ावा देने और दिल्ली एनसीआर में मुख्य रूप से होने वाले वायु प्रदूषण को काफी हद तक कम करने मे मदद करेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक सभी किसानों का विवरण राज्य सरकार के अनाज खरीद पोर्टल पर पहले ही दर्ज किया जा चुका है।

किसानों से खरीदी गई फसलों का भुगतान भी इसी पोर्टल पर किया जाएगा। सरकार अनाज खरीद पोर्टल के माध्यम से किसानों को पराली ना जलाए जाने पर प्रोत्साहित करेगी। अधिकारियों के मुताबिक पहली बार

किसानों को पराली जलाने से दूर रखने के लिए नगद प्रोत्साहन की पेशकश की गई है।
पंजाब के किसानों को एकमात्र सब्सिडी इन सीटू प्रबंधन मशीनरी खरीदने के लिए दी जाती है। द ट्रिब्यून ने शीर्ष अधिकारी के हवाले से कहा है कि अगर भारत सरकार फंड जारी करने में विफल साबित होती है तो हम उन्हें धान की पराली न जलाएं जाने के मुआवजे के रूप में कम से कम 1000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से देंगे।

इसके लिए पंजाब और दिल्ली दोनों ही सरकारों पर 365 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। और अगर केंद्र किसानों को डेढ़ हजार रुपए प्रति एकड़ के मुआवजे के अपने हिस्से का भुगतान करने पर सहमत होता है तो उनका हिस्सा 1095 करोड़ रुपए हो जाएगा। बता दे कि हर वर्ष धान के तहत आने वाले क्षेत्र का लगभग 50% हिस्सा अगली फसल के लिए पराली जला कर तैयार कर लिया जाता है। जिसमें पिछले साल पराली जलाने की 76680 घटनाएं घटित हुई थी। जोकि पिछले कई वर्षों में सबसे अधिक थी।

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