कल बुधवार को मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा, शास्त्रों में है इसका विशेष उल्लेख

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धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक गुरु को विशेष महत्व दिया गया है। इस वर्ष आषाढ़ मास की गुरु पूर्णिमा बुधवार को मनाई जाएगी।
गुरु पूर्णिमा के दिन ही वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म दिवस मनाया जाता है। धूमधाम से मनाई जाने वाली इस गुरु पूर्णिमा का धार्मिक शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है।

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार गुरु ही भगवान तक पहुंचाने का मार्ग बताते हैं इसलिए उन्हें भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। इसी दिन चारों वेदों के रचिता महर्षि वेदव्यास का जन्म दिवस भी मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा से संबंधित कथा का अपना ही एक अलग महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु के अंश स्वरूप कला अवतार है। उन्हें बाल्य काल से ही अध्यात्म रुचि थी। उन्होंने अपने माता-पिता से प्रभु दर्शन करने की इच्छा को व्यक्त किया और वन जाकर तपस्या करने की आज्ञा मांगी। और उन्होंने वनजाकर कठोर तपस्या की। इस तपस्या से ही महर्षि वेदव्यास को संस्कृत भाषा में निपुणता हासिल हुई तत्पश्चात उन्होंने चारों वेदों की रचना की।

माना जाता है कि महर्षि वेदव्यास आज भी हमारे बीच किसी ना किसी रूप में उपस्थित हैं। महर्षि वेदव्यास को अमरता का वरदान प्राप्त था। अतः हिंदू धर्म में वेदव्यास को ईश्वर के रूप में पूजा जाता है। वेदव्यास के जन्मदिन होने के कारण इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। श्रद्धालुओं द्वारा इसे पूरी श्रद्धा से धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

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