हाई वोल्टेज से टीवी, कूलर और पंखा फुंकने पर यहां करें शिकायत, मिलेगा नया

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देश में बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनकी शिकायत रहती है कि बिजली के हाई वोल्टेज की वजह से उनका कीमती सामान अक्सर फुंक (Bunrt) जाता है. उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली विभाग भी उनकी इस परेशानी दूर नहीं कर पाता है.
जब कभी किसी एरिया में ऐसा होता है तो लोग विद्युत सब स्टेशन का घेराव कर हंगामा करते हैं. लेकिन हंगामे और शिकायत बावजूद बिजली विभाग न तो कोई कार्रवाई करता है और न ही मुआवजा देता है. ऐसे में सवाल यह है कि अगर हजारों रुपये के कीमती इलेक्ट्रॉनिक सामान बिजली विभाग की ही गलती से फुंक जाए तो उपभोक्ता क्या करे? क्या उपभोक्ता बिजली विभाग पर मुआवजा का दावा ठोक सकता है?

देश के तकरीबन हर राज्यों में इस तरह की परेशानी लोगों के सामने अक्सर खड़ी रहती हैं. लोगों को मोदी सरकार के नए उपभोक्ता कानून के बारे में पता नहीं होने के कारण नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि देश में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 में ग्राहकों को या उपभोक्ताओं को ऐसे अधिकार मिले हैं कि अगर वह उसका इस्तेमाल करे तो उसे नुकसान की भरपाई सूद सहित वापस मिल सकता है.

हाई वोल्टेज से सामान फुंके तो क्या करें

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ ऊर्जा मंत्रालय का भी साफ कहना है कि ग्राहकों या उपभोक्ताओं के किसी भी हित का उल्लंघन होने पर बिजली कंपनियां बच नहीं सकती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने 20 जुलाई, 2020 से पूरे देश में कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 लागू कर दिया है. कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-2019 लागू हो जाने के बाद उपभोक्ताओं को कई तरह के अधिकार मिल गए हैं. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 ग्राहक को उन कंपनियों से भी लड़ने का ताकत देता है, जो पहले के उपभोक्ता कानून में नहीं था.

नए कानून के तहत उपभोक्ता अदालतों के साथ-साथ एक केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) बनाया गया है. इस प्राधिकरण का गठन उपभोक्ता के हितों की रक्षा कठोरता से हो इसके लिए की गई है. कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 लागू हो जाने के बाद उपभोक्ता किसी भी उपभोक्ता न्यायालयों में मामला दर्ज करा सकेगा. पहले के कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था.

कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 की प्रमुख विशेषताएं

1-केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की स्थापना- इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना होगा. इसके साथ-साथ अनुचित व्यापारिक गतिविधियां, भ्रामक विज्ञापनों और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों को भी देखेगा और त्वरित गति से उसका निपटारा करेगा.

 

2-उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Disputes Redressal Commission) का गठन- इस आयोग का काम है कि अगर आपसे कोई अधिक मूल्य वसूलता है, आपके साथ अनुचित व्यवहार करता है, जीवन के लिए खतरनाक और दोषपूर्ण वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री की जाती है तो इसकी शिकायत सीडीआरसी सुनेगी और फैसला सुनाएगी.

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