सुपरटेक नोएडा की तरह ओमेक्स बहादुरगढ़ के टावर को जनहित में गिरवाने के लिए जाएंगे अदालत

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ओमेक्स डायरेक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी करने से संबंधित कोर्ट में चलेगा केस अब लेनी होगी कोर्ट से जमानत नहीं तो जाना होगा जेल : प्रमोद गुप्ता

प्रमोद गुप्ता ने ओमेक्स डायरेक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी करने से संबंधित 17 दिसंबर 2014 को दर्ज कराई थी एफआईआर

पीड़ित प्रमोद गुप्ता ने पत्रकार वार्ता में कहा ,माननीय न्यायालय से जरूर मिलेगा न्याय

सुपरटेक नोएडा की तरह ओमेक्स बहादुरगढ़ के टावर को जनहित में गिरवाने के लिए माननीय अदालत में जाएंगे

एफ आई आर दर्ज कराने पर मुझे डराया व धमकाया गया, जांच अधिकारी ने भी दिया ओमेक्स प्रबंधकों का साथ

बहादुरगढ़। ओमेक्स प्रबंधकों द्वारा की गई मनमानी व धोखाधड़ी के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले शहर के मॉडल टाउन निवासी प्रमोद गुप्ता द्वारा ओमेक्स लिमिटेड के डायरेक्टरों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर पर माननीय सेशन कोर्ट झज्जर ने लोअर कोर्ट को सम्मन करके ट्रायल चलाने का आदेश जारी किया है । सेशन कोर्ट ने बहादुरगढ़ न्यायालय द्वारा प्रमोद गुप्ता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर रद्द करने के दिए गए फैसले को निरस्त कर दिया है । यह जानकारी ओमेक्स प्रबंधन द्वारा धोखाधड़ी का शिकार हुए प्रमोद गुप्ता ने गौरेया टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स में आयोजित पत्रकारवार्ता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।
प्रमोद गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि
ओमेक्स लिमिटेड के डायरेक्टर रोहतास गोयल, सुनील गोयल ,जयभगवान गोयल ,संदीप मंगला व अन्य पर एफ आई आर नंबर 495 दिनांक 17-12. 2014 भारतीय दंड सहिंता 406,420,467,468,471 and 120 – B IPC के तहत सही ठहराया व आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। यह एफआईआर प्रमोद गुप्ता प्रबंधक बंसल पोल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ओमेक्स लिमिटेड के डायरेक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी करने बाबत कराई गई थी। क्योंकि ओमेक्स प्रबंधन द्वारा धोखाधड़ी करने के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पर मुझे कई बार डराया व धमकाया गया था।

ओमेक्स प्रबंधकों ने इस तरह की धोखाधड़ी

बहादुरगढ़ में ओमेक्स ने कई बड़े टावर और फ्लैट बनाए हैं लेकिन यहां पर कई उपभोक्ताओं के साथ फ्लैट देने के नाम पर धोखा भी किया गया। ऐसा ही धोखा प्रमोद गुप्ता के साथ किया गया। बहादुरगढ़ के मॉडल टाउन कॉलोनी में रहने वाले बंसल पोल्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर प्रमोद गुप्ता ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने बहादुरगढ़ ओमेक्स के सेल्सिया व अन्य टावर में साल 2007 में फ्लैट बुक करवाया था । जिसके लिए उन्होंने 23 अप्रैल 2008 तक 6 लाख 30 हजार रुपये की दो किस्ते भी जमा करा दी थी जिसे 18 महीने में तैयार करके देना था लेकिन टावर निर्माण का कोई काम शुरू नहीं हुआ। बार-बार पता करने पर 2 साल बाद ओमेक्स प्रबंधन द्वारा 2010 में उन्हें बताया गया कि सेल्सिया व अन्य टावर बनाने की उनके पास परमिशन नहीं है इसलिए उन्हें दूसरी जगह ग्राउंड फ्लोर पर 3 बैडरूम का 106 नंबर फ्लैट अलॉट किया गया है। इसके नाम पर भी गुप्ता ने 2 लाख 90 हजार 623 रुपये की एक और किस्त जमा करा दी।

28 मई 2012 को गुप्ता ने ओमेक्स के साथ बिल्डर एंड बायर एग्रीमेंट साइन किया जिसके बाद उन्हें पता चला कि जिस जगह उन्हें 106 नंबर फ्लैट अलॉट किया है वहां तो 9 मई 2012 को ही दुकानें बनाकर बेच दी गई है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बंसल पोल्स ने 18 फ्लैट बुक कराए थे । जिसमें से ओमेक्स ने जानबूझकर 9 फ्लैट कैंसिल कर दिए और उन्हें 9 फ्लैट अलॉट किए। अलॉट किए गए 9 फ्लैट में से एक फ्लैट की जगह पर धोखाधड़ी करके दुकान बनाकर ओमेक्स ने बेच दी व पूरी पेमेंट देने के बाद भी आज तक ओमेक्स प्रबंधन ने उनके 8 फ्लैटों की जानबूझकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए व पैसों व प्रॉपर्टी का का गबन करने के लिए रजिस्ट्री नहीं करवाई है। गुप्ता ने बताया कि इस तरह ओमेक्स से मुझे लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपए की ठगी की हुई है।

एफआईआर दर्ज कराने के बाद भी कार्यवाही करने को बजाय मुझ पर समझौते का हर जगह से दबाव बनाया गया

ओमेक्स द्वारा की गई धोखाधड़ी से हैरान हो चुके प्रमोद गुप्ता ने इसकी लिखित शिकायत 1 दिसंबर 2014 को एसपी झज्जर के पास की । जिस पर 17 दिसंबर 2014 को एफआईआर नंबर 495 भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420 ,467, 468, 471 के तहत दर्ज हो गई। लेकिन उसके बाद भी एफआईआर में दर्ज नामित ओमेक्स के सीएमडी रोहतास गोयल, जेएमडी सुनील गोयल, डायरेक्टर जयभगवान गोयल , संदीप मंगला, मार्केटिंग प्रोफेशनल अनिल वधवा की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। उल्टा उनकी तरफ से ही उन्हें एफआईआर वापिस लेने के लिए तरह-तरह की धमकियां दी जाने लगी। गुप्ता ने बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत उन्होंने तत्कालीन डीजीपी यशपाल सिंघल को की। इसके अलावा उन्होंने दोबारा से नए डीजीपी के पी सिंह को भी सभी सबूतों के साथ 16 अप्रैल 2016 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेजकर न्याय दिलवाने की मांग की। प्रमोद गुप्ता ने बताया कि 18 अप्रैल 2016 को उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को सीएम विंडो के माध्यम से दोबारा उनके साथ की गई धोखाधड़ी की शिकायत की। मगर उन्हें कहीं से भी न्याय नहीं मिला उल्टा सरकार में बैठे लोगों व जांच अधिकारी एएसआई नरेंद्र द्वारा मुझ पर ही राजीनामा करवाने का दबाव बनाया गया मगर उन्होंने हार नही मानी।

सुपरटेक टावर की तरह ओमेक्स के बने टावर जनहित में गिरवाने के लिए जल्द करेंगे केस दर्ज

प्रमोद गुप्ता ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि वह जल्द ही ओमेक्स द्वारा बनाए गए टॉवर को जनहित में गिरवाने के लिए माननीय न्यायालय की शरण में जाएंगे ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की भारी जान -माल की हानि के नुकसान से समय रहते बचा जा सके। क्योंकि इन टावरों को बनाने में भारी अनियमितताएं है और जाली कागजात पर इन सब टावरों को बनाया गया है तथा बहुत ही घटिया किस्म की सामग्री इस्तेमाल की गई है उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से ओमेक्स टावर में रहने वाले निवासी मूल सुविधाओं की भारी कमी, टावर की मेंटीनेंस व रख रखाव ठीक से नहीं करने को लेकर अधिकारियों से शिकायत देने के साथ-साथ ओमेक्स प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं। इसलिए जिस प्रकार नोएडा में माननीय न्यायालय के आदेश पर सुपरटेक के 40 – 40 मंजिल के दो टावर गिराने के आदेश जारी किए हैं उसी प्रकार वे जनहित में ओमेक्स के टावर गिरवाने की मांग को लेकर माननीय न्यायालय में जाएंगे ताकि बहादुरगढ़ के ओमेक्स टावर में रहने वाले लोगों का अनमोल जीवन सुरक्षित रह सके।

अब न्याय की आस जगी

दिसंबर 2014 में एफ .आई .आर दर्ज करवाने के बाद किसी भी पुलिस अधिकारी या सरकार में बैठे जनप्रतिनिधि ने इस मामले में उन्हें न्याय नहीं दिलवाया। मुख्यमंत्री से लेकर एसपी, आईजी, डीजीपी तक शिकायत की मगर हर जगह उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला और आरोपियों पर कोई कार्यवाही नही की गई। प्रमोद गुप्ता ने कहा कि अब माननीय एडिशनल सेशन जज ज्योति लांबा की कोर्ट के आदेश से उन्हें न्याय मिलने की आस जगी है। माननीय न्यायालय के आदेश पर धोखाधड़ी वह जालसाजी करने के आरोपियों पर न्यायालय में मुकदमा चलेगा। पीड़ित प्रमोद गुप्ता ने कहा कि अगर अन्य लोग भी इस तरह की धोखाधड़ी के शिकार है तो वह हताश होने तथा हार मानने की बजाय भारतीय न्यायपालिका में विश्वास रखते हुए अपनी आवाज को बुलंद करें क्योंकि आखरी में जीत सत्य की ही होगी।

दूसरे की जमीन व लाइसेंस पर ओमेक्स प्रबंधकों ने फ्लैट बनाकर बेचे

प्रमोद गुप्ता ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि बहादुरगढ़ में ओमेक्स ने 2006- 07 में जो फ्लैट का प्रोजेक्ट लांच किया उस समय ओमेक्स के पास ना तो जमीन उनके नाम है और ना ही लाइसेंस उनके नाम पर है ! प्रमोद गुप्ता ने बताया कि जे .एस .एम इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड व प्रिमोरडीएल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंस पर ओमेक्स प्रबंधन द्वारा फ्लैट बनाए गए हैं जो कि 15.33 एकड़ में है और ओमेक्स के अकाउंट में ही सभी फ्लैटों की पेमेंट ली गई है और ना ही बिल्डर बायर एग्रीमेंट में इन असली जमीन में लाइसेंस के मालिकों के बारे में लिखा गया है जो की पूरी तरह से फ्लैट धारकों के साथ धोखाधड़ी व जालसाजी है। प्रमोद गुप्ता ने बताया कि जबकि हकीकत में इन दोनों कंपनियों में ओमेक्स के डायरेक्टर किसी भी पद पर नही है। ओमेक्स प्रबंधन द्वारा यह अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके हरियाणा सरकार के साथ भी बहुत बड़ा धोखा किया गया है। पत्रकार वार्ता के दौरान एडवोकेट अजय शर्मा भी मौजूद रहे।

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