मोदी सरकार चला रही लूटो और भागो योजनाः कांग्रेस

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अब तक के सबसे बड़े बैंक घोटाले के लिए कांग्रेस ने मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जांच में देर मोदी सरकार में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की सांठगांठ और आपसी मिलीभगत के सबूत सामने आ चुके हैं।देश में बैंकों से पैसे लेकर भागने वालों को लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने रविवार को केन्द्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने ऋषि अग्रवाल और अन्य के मालिकाना हक वाली गुजरात स्थित एबीजी शिपयार्ड कंपनी द्वारा कथित रूप से 28 कंपनियों को चूना लगाए जाने के लिए रविवार को केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए चंडीगढ़ में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले 75 साल में भारत की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी मोदी सरकार की निगरानी में हुई है। सात साल में 5 लाख 35,000 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी ने देश में बैंकिंग प्रणाली को ध्वस्त करके रख दिया है।

धोखाधड़ी करने वालों के सत्तारूढ़ पार्टी संग है करीबी रिश्ते

सुरजेवाला ने कहा कि पिछले 75 साल में पहली बार 22 हजार 842 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि पांच साल तक टालमटोल करके जनता के धन को दिनदहाड़े गबन करने की छूट देने के बाद आखिरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में सात फरवरी को एफआरआई दर्ज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार बैंक के साथ धोखाधड़ी करने वालों के लिए लूटो और भागो योजना चला रही है। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी करने वालों की सूची में नीरव मोदी यानी छोटा मोदी, मेहुल चोस्की, नीशल मोदी, ललित मोदी, विजय माल्या, जतिन मेहता, चेतन संदेसरा, नितिन संदेसरा और अन्य कई नाम हैं, जिनका सत्तारूढ़ पार्टी के साथ करीबी रिश्ता रहा है। ऋषि अग्रवाल और अन्य लोग शहंशाह के नए रत्न हैं।

सीबीआई में हुई देरी पर उठाया सवाल

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में कहा है कि आठ नवंबर 2019 को एसबीआई ने एबीजी शिपयार्ड के ऋषि अग्रवाल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए सीबीआई में अपनी शिकायत दी। इस धोखाधड़ी और जनता के पैसे के गबन के बावजूद सीबीआई, एसबीआई और मोदी सरकार ने पूरे मामले को लालफीताशाही और आपसी टकराव में उलझा दिया। ये कई साल तक होता रहा और जनता का धन नाली में बहता रहा और धोखेबाज लाभ उठाते रहे। उन्होंने ने कहा कि एक और मजेदार तथ्य यह है कि कैग की रिपोर्ट के बावजूद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने गुजरात के दाहेज में एबीजी शिपयार्ड को 50 हेक्टेयर भूमि आवंटित की। दाहेज परियोजना को शिपयार्ड कंपनी ने वर्ष 2015 में बंद कर दिया।

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