जहां लोग चाहते हैं उन्हें कॉरोना हो जाये

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बाकी दुनिया में जहां जल्द से जल्द संपूर्ण आबादी के वैक्सीनेशन, बचाव के तरीके अपनाने और एहतियात बढ़ाने पर जोर है, लेकिन ऑस्ट्रिया में लोग इसके उलट ही चल रहे हैं. यहां लोग कोरोना से बचाव नहीं कर रहे हैं, बल्कि जान-बूझकर कोरोना संक्रमण मोल ले रहे हैं. ये डरावना खुलासा तब हुआ, जब पिछले हफ्ते 55 साल के व्यक्ति की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई.

जब संक्रमण की चेन को ट्रेस किया गया तो पता चला कि जिस व्यक्ति की मौत हुई है, वो जानबूझकर एक ऐसी पार्टी में गया था जहां पहले से ही एक-दो संक्रमित लोग शामिल थे. ये बात उसे अच्छी तरह मालूम थी और उसके पार्टी में जाने का मकसद भी कोरोना संक्रमित होना था. अपनी जिंदगी दांव पर लगाने की इस घटना से सब सिहर उठे, क्योंकि ऑस्ट्रिया वो देश है जो कोरोना की भीषण लहर से कराह रहा है.

ऑस्ट्रिया में 1 लाख 95 हजार से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आए

91 लाख की आबादी वाले इस मुल्क में अब तक 1 लाख 95 हजार से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं. हर दिन औसतन 14 से 15 हजार केस आ रहे हैं और जिसकी वजह से वहां एक बार फिर लॉकडाउन लगाना पड़ गया है, लेकिन ऐसे हालात में एक शख्स के जान-बूझकर संक्रमित होने की ख्वाहिश से खलबली मच गई. सवाल उठे कि आखिर कोविड प्रोटोकॉल का पालन और वैक्सीनेशन की जगह उसने पार्टी में जाना और संक्रमित होना क्यों चुना. इस सवाल का जो जवाब मिला, उसने सबको सन्न कर दिया.

पता चला कि ऑस्ट्रिया में ऐसी पार्टियों का चलन बढ़ गया है, जिसमें एक या उससे ज्यादा कोरोना संक्रमित शामिल होते हैं और उस पार्टी में बाकी स्वस्थ लोग संक्रमित होने के लिए आते हैं. कई लोग तो अपने बच्चों को लेकर भी जाते हैं ताकि वो भी संक्रमित हो जाएं. पार्टी में संक्रमितों को जबरदस्ती गले लगाया जाता है. संक्रमित शख्स के साथ खाना-पीना भी किया जाता है, लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर ऐसी पार्टी कुछ लोगों की सनक भर है या कारण कुछ और है.

वैक्सीन को लेकर हिचक और ग्रीन पास सबसे बड़ी वजह

जवाब ये है कि खुद को संक्रमित करवाने के पीछे दो वजह हैं. एक है वैक्सीन को लेकर हिचक और दूसरी है ग्रीन पास. दरअसल ऑस्ट्रिया में प्राइवेट या पब्लिक सेक्टर में काम करने वाले हर व्यक्ति के पास ग्रीन पास अनिवार्य कर दिया गया है. अगर ग्रीन पास नहीं है तो काम से रोक दिया जाएगा. ग्रीन पास तभी मिलता है, जब या तो आप को वैक्सीन की दोनों डोज लगी हों या फिर कोरोना संक्रमण के बाद रिकवर हो गए हों और एंटीबॉडी बन गई हों.

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