संत समाज की आपत्ति पर रेलवे का निर्णय, रामायण एक्सप्रेस में वेटर्स की बदली ड्रेस

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साधु-संतों के भारी विरोध के चलते आईआरसीटीसी ने रामायण सर्किट स्पेशल ट्रेन में सर्विस देने वाले वेटर्स की ड्रेस बदल दी है. ये वेटर्स रामायण एक्सप्रेस में सेवा दे रहे थे. उज्जैन के साधु-संतों की आपत्ति के बाद रेलवे ने यह निर्णय लिया.सोमवार शाम को आईआरसीटीसी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. अयोध्या-रामेश्वरम ट्रेन में भगवा ड्रेस पहने बर्तन उठा रहे वेटर्स का वीडियो वायरल होने के बाद, उज्जैन के संत समाज ने इसे साधु संतों का अपमान बताया था. इसपर रेल मंत्री को चिट्ठी लिखी गई, साथ ही ट्रेन रोकने की चेतावनी भी दी गई थी.

पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे की तरफ से रामायण यात्रा ट्रेन चालई गई है. रेलवे ने रामायण को आधार बनाते हुए ट्रेन के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भगवा कपड़े को ड्रेस के तौर पर निर्धारित किया था. अब रेलवे ने इसे पूरी तरह से बदल दिया है. रेलवे ने कर्मचारियों की पोशाक को बदलते हुए कहा कि अगर किसी को असुविधा हुई है तो उसके लिए खेद है.

वर्कर्स के लिए यह था पहनावा

रेलवे ने रामायण सर्किट स्पेशल ट्रेन में काम करने वाले कर्मचारियों का पहनावा साधु संतों की तरह तय किया था. इसमें सभी कर्मचारियों को भगवा धोती, कुर्ता, पगड़ी और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई थी. सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में ट्रेन के वेटर्स साधु संतों के भगवा कपड़े, धोती, पगड़ी और रुद्राक्ष की माला पहने खाने के बर्तन उठाते नजर आ रहे थे. उज्जैन अखाड़ा परिषद के पूर्व महामंत्री परमहंस अवधेश पुरी महाराज ने कहा था कि ये अपमान है. जल्द ही वेटर्स की ड्रेस को बदला जाए, वरना 12 दिसंबर को निकलने वाली अगली ट्रेन का संत समाज विरोध करेगा और ट्रेन के सामने हजारों हिन्दुओं को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा.

भगवान राम के 15 स्थानों से गुजरेगी ट्रेन

पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से रेलवे ने भगवान पर आस्था रखने वाले लोगों के लिए रामायण सर्किट स्पेशल ट्रेन 7 नवंबर को चलाई थी. कर्माचारियों के पहनावे को लेकर यह ट्रेन शुरू से ही विवादों में थी. यह स्पेशल ट्रेन भगवान राम से जुडे कुल 15 स्थानों से होते हुए कुल 7500 किमी की दूरी तय करेगी. इस ट्रेन का पहला स्टेशन अयोध्या और अंतिम स्टेशन रामेश्वरम होगा. इस ट्रेन को रेलवे की तरफ से देखो अपना देश पहल के तहत चलाया गया है.

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