ऑपरेशन फॉल्स फ्लैग की आड़ में यूक्रेन पर केमिकल-बायोलॉजिकल अटैक कर सकता रूस

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रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी से जंग चल रही है. कई यूक्रेनी शहर पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं. अमेरिका और नाटो देश लगातार यूक्रेन को हथियार मुहैया करवा रहे हैं, जिससे रूस को भारी नुकसान पहुंचा है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की नाटो में शामिल होने का जिद छोड़ चुके हैं, लेकिन अभी भी कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनी है.

भारी गोलाबारी और हवाई हमलों के बावजूद कीव पर कब्जा न होते देख रूस विनाशक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. ऐसी स्थिति में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की झुंझलाहट बढ़ती जा रही है. ऐसे में सामरिक विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि रूस खीझ भरी स्थिति में रासायनिक और जैविक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. गौरतलब है कि विश्व युद्ध और उसके बाद कई बार दूसरे देशों के बीच हुए युद्ध में पहले भी रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल हो चुका है. इस हमले में लाखों लोगों की जान जा चुकी है. इस बार भी अमेरिका समेत नाटो देश पहले ही कह चुके हैं कि ऑपरेशन फॉल्स फ्लैग की आड़ में रूस यूक्रेन पर केमिकल-बायोलॉजिकल अटैक कर सकता है.

रूस ने यूक्रेन पर हमले के साथ ही अमेरिका पर यूक्रेन में रासायनिक और जैविक हथियार बनाने का आरोप लगाया था. इसके साथ ही पुतिन ने अमेरिका समेत पश्चिमी देशों को चेतावनी भी दी थी कि उसके पास परमाणु हथियार भी हैं. यूक्रेन मसले पर किसी किस्म के दुस्साहस की परिणति तीसरे विश्व युद्ध समेत कहीं विध्वंसक रूप ले लेगा.

क्या है ऑपरेशन फॉल्स फ्लैग

फॉल्स फ्लैग अभियान के तहत कोई देश खुद ही अपने देश के किसी हिस्से पर हमला करता है. इसके बाद किसी दूसरे देश पर हमले का आरोप लगाता है. फिर इसी आधार पर जवाबी कार्रवाई करता है. रूस और यूक्रेन के बीच तनातनी का माहौल शुरू होने के बाद से पश्चिम के कई देशों ने इसको लेकर लगातार चेतावनी दी थी. अब सामरिक विशेषज्ञ यह आशंका भी जता रहे हैं कि इसी ऑपरेशन के तहत रूस यूक्रेन में अपने समर्थन वाले किसी हिस्से में छोटे स्तर पर रासायनिक या जैविक हमला कर यूक्रेन पर केमिकल या बायोलॉजिकल वेपंस चला सकता है.

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