मां के गहने गिरवी रख बहनों ने तैयार किया फूलों की खेती का शानदार मॉडल

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जादूगोड़ा के कालापाथर गांव की दो बहने इन दिनों महिलाओं के लिए एक मिसाल बनी हुई हैं। लॉकडाउन के दौरान जहां एक ओर युवा पीढ़ी तनाव मानसिक रोगों से जूझ रही थी वहीं दूसरी ओर यह दोनों बहने अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए व्यवसाय तलाश कर रही थी इसी बीच इंटरनेट के माध्यम से मिले स्वरोजगार के आईडिया ने इनकी जिंदगी बदल दी।

नेट पर मिली जानकारी के मुताबिक इन्होंने जरबेरा के फूलों की खेती करने का निश्चय किया। शहरों में बढ़ती जरबेरा फूलों की मांग ने इनके सपने को साकार कर दिया।

बता दें कि प्रियंका और प्रीति ने जरबेरा फूलों की खेती करने का निश्चय लॉक डाउन के दौरान किया। इनके पिता नव किशोर भगत काविड में लॉक डाउन के दौरान बेरोजगार हो गए थे। ऐसी स्थिति में बेटियों ने पिता का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया उन्होंने स्वरोजगार करने की ठानी। इंटरनेट के माध्यम से मिले आइडिया से उन्होंने जरबेरा फूलों की खेती करने की ठानी। इस कार्य की शुरुआत के लिए लगभग एक लाख रुपए की जरूरत थी इसके लिए मां ने अपने गहने गिरवी रख दिए थे।

शुरुआत में 20 कट्टा जमीन पर यह खेती की जाती थी जबकि आज परिवार की मासिक आय 50 से 60 हजार रुपए है। इन से प्रेरित होकर आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांव के किसान जरबेरा फूलों की खेती के साथ-साथ अन्य कई प्रकार के फूलों की खेती कर रहे हैं। जो कि अपने आप में एक अनूठी पहल है।

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